कदर न करने पर उपरवाला
छीन ही लेता है ,
वक्त भी और शख्स भी
शीर्षक: कदर न करने पर ऊपरवाला छीन ही लेता है—वक्त भी और शख्स भी
हम अक्सर जिंदगी में उन चीजों के पीछे भागते हैं जो हमारे पास नहीं हैं, और इस आपाधापी में उन्हें भूल जाते हैं जो हमारे बिल्कुल सामने हैं। इंसान की यह फितरत पुरानी है कि वह हासिल चीज़ की अहमियत तब तक नहीं समझता, जब तक वह उसकी पहुंच से दूर नहीं हो जाती। लेकिन कायनात का एक कड़ा नियम है: "जिस चीज़ की तुम कदर नहीं करोगे, वह तुमसे छीन ली जाएगी।" और जब ऊपरवाले की लाठी चलती है, तो वह सबसे पहले दो ही चीज़ें छीनता है—वक्त और शख्स।
१. जब वक्त हाथ से फिसल जाता है
वक्त की एक खासियत है—यह कभी किसी के लिए नहीं रुकता। चाहे कोई कितना भी अमीर हो या ताकतवर, बीते हुए कल को कोई दोबारा खरीद नहीं सकता।
टालमटोल की आदत: हम अक्सर सोचते हैं कि "कल कर लेंगे" या "अभी तो बहुत समय है"। यह सोचकर हम सही मौके, करियर के बेहतरीन साल और अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं।
खामोश विदाई: वक्त कभी शोर मचाकर नहीं जाता। वह चुपके से गुजर जाता है, और पीछे छोड़ जाता है सिर्फ एक शब्द—'काश'। जब हम वक्त की कदर नहीं करते, तो ऊपरवाला हमसे वह अनुकूल समय छीनकर हमें कड़े संघर्ष के दौर में डाल देता है।
"वक्त की कीमत उस सिक्के जैसी है, जिसे अगर सही जगह खर्च न किया जाए, तो वह धीरे-धीरे अपने आप खत्म हो जाता है।"
२. जब अनमोल लोग दूर हो जाते हैं
वक्त से भी ज्यादा दर्दनाक होता है किसी शख्स का जिंदगी से चले जाना। हमारे आस-पास कुछ लोग ऐसे होते हैं जो निस्वार्थ भाव से हमसे प्यार करते हैं, हमारी परवाह करते हैं और हर मुश्किल में हमारे साथ खड़े रहते हैं। लेकिन अक्सर हम उन्हें 'ग्रैंटिड' (Granted) ले लेते हैं।
अहंकार और अनदेखी: जब हम किसी के प्यार और वक्त को उनकी कमजोरी मान लेते हैं, तो हम अनजाने में उनके सब्र का इम्तिहान ले रहे होते हैं।
ऊपरवाले का फैसला: जब किसी अच्छे इंसान के आत्मसम्मान को बार-बार ठेस पहुंचती है, तो ऊपरवाला उसे हमारे जीवन से दूर कर देता है। कभी-कभी वह शख्स खुद हारकर दूर चला जाता है, तो कभी परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि चाहकर भी दोनों दोबारा एक नहीं हो पाते।
कदर करना क्यों जरूरी है? (एक कड़वा सच)
नीचे दी गई तालिका स्पष्ट करती है कि कदर करने और न करने का हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ता है:
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